अगरहोचश्म-ए-हक़ीक़ततोदेखक्याहूँमैं
फ़नाकेरंगमेंइकजौहर-ए-बक़ाहूँमैं
तिलिस्म-ए-बंदसेमुश्किलरिहाईहैदिलकी
हिसार-ए-चश्म-ए-फ़ुसूँ-साज़मेंघिराहूँमैं
मिटामिटाकेमुझेएकदिनमिटादेगा
ज़माना-साज़तिरीचालजानताहूँमैं
कमाल-ए-इश्क़तसव्वुरहैऔजपरऐसा
तिरेजमालकोहरशयमेंदेखताहूँमैं
मिरीतलाशमेंगुमहैंमुसाफ़िरान-ए-अदम
हुदूद-ए-वहमसेआगेनिकलगयाहूँमैं
तलाशजिसकीहैहरइककोमैंवोमंज़िलहूँ
जोतयनकरसकेकोईवोमरहलाहूँमैं
तलाशजिसकीमुझेखोचुकीहैऐ'ग़व्वास'
उसीकोबहर-ए-तहय्युरमेंढूँढताहूँमैं