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Faizan Faizi
mujhe aadat badalni hai puraani
mujhe aadat badalni hai puraani | मुझे आदत बदलनी है पुरानी
- Faizan Faizi
मुझे
आदत
बदलनी
है
पुरानी
नया
इक
इश्क़
करना
है
मुझे
अब
- Faizan Faizi
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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फिर
वही
रोना
मुहब्बत
में
गिला
शिकवा
जहाँ
से
रस्म
है
बस
इसलिए
भी
तुम
को
साल-ए-नौ
मुबारक
Neeraj Neer
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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तुम
सेे
बिछड़े
तो
हम
किसी
कहानी
में
मरेंगें
बचपन
की
मेरी
ख्वा़हिश
अब
ज़वानी
में
मरेंगें
Faizan Faizi
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तिरी
तस्वीर
को
मैं
ज़ूम
कर
के
बहुत
से
काम
करता
जा
रहा
हूँ
Faizan Faizi
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मुझे
भी
बाद
मरने
के
ख़ुदा
जन्नत
में
डालेगा
दुआएँ
हैं
मिरी
हमराह
मेरे
दोस्त
भी
जाएँ
Faizan Faizi
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ज़माने
से
उलझना
छोड़
दो
ऐ
हिंद
के
लोगों
हमारा
काम
तो
बस
मुल्क
को
आगे
बढ़ाना
है
Faizan Faizi
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तुम
फ़क़त
बस
देखते
रह
जाओगे
हम
यहाँ
इतिहास
लिखते
जाएँगे
Faizan Faizi
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