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Faizan Faizi
zamaane se uljhana chhod do ai hind ke logon
zamaane se uljhana chhod do ai hind ke logon | ज़माने से उलझना छोड़ दो ऐ हिंद के लोगों
- Faizan Faizi
ज़माने
से
उलझना
छोड़
दो
ऐ
हिंद
के
लोगों
हमारा
काम
तो
बस
मुल्क
को
आगे
बढ़ाना
है
- Faizan Faizi
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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सारे
जहाँ
से
अच्छा
हिन्दोस्ताँ
हमारा
हम
बुलबुलें
हैं
इस
की
ये
गुलसिताँ
हमारा
Allama Iqbal
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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सभी
का
ख़ून
है
शामिल
यहाँ
की
मिट्टी
में
किसी
के
बाप
का
हिन्दुस्तान
थोड़ी
है
Rahat Indori
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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हम
हैं
हिन्दी
और
हमारा
मुल्क
है
हिन्दोस्ताँ
हिन्द
में
पैदा
तसव्वुफ़
के
ज़बाँ-दाँ
कीजिए
Sahir Dehlavi
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सर-ज़मीन-ए-हिंद
पर
अक़्वाम-ए-आलम
के
'फ़िराक़'
क़ाफ़िले
बसते
गए
हिन्दोस्ताँ
बनता
गया
Firaq Gorakhpuri
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नक़्शा
ले
कर
हाथ
में
बच्चा
है
हैरान
कैसे
दीमक
खा
गई
उस
का
हिन्दोस्तान
Nida Fazli
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आदमी
देश
छोड़े
तो
छोड़े
'अली'
दिल
में
बसता
हुआ
घर
नहीं
छोड़ता
एक
मैं
हूँ
कि
नींदें
नहीं
आ
रही
एक
तू
है
कि
बिस्तर
नहीं
छोड़ता
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Ali Zaryoun
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ये
जो
तुम
कर
रही
हो
मुझ
सेे
बेरूख़ी-सी
बातें
बड़ा
दुख
होगा
तुम्हें
तोड़
कर
हम
सेे
हसीं
नातें
फिर
न
कहना
के
बदल
गया
हूँ
मैं
मोहब्बत
में
मैं
कब
तक
सहूँगा
आख़िर
तेरी
तल्ख़-सी
बातें
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Faizan Faizi
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हमारे
पास
भी
बैठा
करो
तुम
बुरी
आदत
से
बचना
चाहता
हूँ
Faizan Faizi
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मुझे
भी
बाद
मरने
के
ख़ुदा
जन्नत
में
डालेगा
दुआएँ
हैं
मिरी
हमराह
मेरे
दोस्त
भी
जाएँ
Faizan Faizi
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सुना
है
चाँद
सी
काफ़ी
हसीं
है
नहीं
देखा
मगर
ख़ूबी
बहुत
है
नहीं
करना
किसी
से
दोस्ती
अब
हमारे
साथ
इक
सूफी
बहुत
है
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Faizan Faizi
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सजा
कर
फूल
बालों
में
हमारे
पास
आते
हैं
अदब
से
बैठ
के
कुछ
देर
फिर
गज़लें
सुनाते
हैं
गिरा
कर
ज़ुल्फ़
अपनी
फिर
अदा-ए-नाज़
से
बोलें
सुनो
हम
प्यार
में
लोगों
को,
यूँँ
पागल
बनाते
हैं
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Faizan Faizi
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