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Faizan Faizi
bas nabi ke shaan ki khaatir humeen
bas nabi ke shaan ki khaatir humeen | बस नबी के शान की ख़ातिर हमीं
- Faizan Faizi
बस
नबी
के
शान
की
ख़ातिर
हमीं
चल
दिए
तन्हा
फ़कत
मैदान
में
दुश्मनों
की
फ़ौज
जब
हो
सामने
उस
घड़ी
हो
ताज़गी
ईमान
में
- Faizan Faizi
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कहते
हैं
उम्र-ए-रफ़्ता
कभी
लौटती
नहीं
जा
मय-कदे
से
मेरी
जवानी
उठा
के
ला
Abdul Hamid Adam
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मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
Mehshar Afridi
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रात
भी
नींद
भी
कहानी
भी
हाए
क्या
चीज़
है
जवानी
भी
Firaq Gorakhpuri
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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ये
जो
ढलती
हुई
जवानी
है
हर
नए
साल
की
कहानी
है
देख
आँखें
मेरी
बता
मुझको
इस
में
किस
नाम
की
निशानी
है
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Aman Mishra 'Anant'
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याद
आओ
मुझे
लिल्लाह
न
तुम
याद
करो
मेरी
और
अपनी
जवानी
को
न
बर्बाद
करो
Akhtar Shirani
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कभी
ज़रा
पास
आके
बैठो
नई
जवानी
चहक
रही
है
नई
उमंग
इक
नई
तरंग
इक
नये
चमन
में
महक
रही
है
Amaan Pathan
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ये
इश्क़-विश्क़
का
क़िस्सा
तमाम
हो
जाए
सफ़ेद
दाढ़ी
हवस
की
गुलाम
हो
जाए
जवान
लड़कियों
बूढ़ों
से
तुम
रहो
हुश्यार
न
जाने
कौन
कहाँ
आसाराम
हो
जाए
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Paplu Lucknawi
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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इक
ग़ज़ल
हो
"जौन"
जैसी
भी
यहाँ
का़फ़ीया
जो
हो
मुक़म्मल
ज़ब्त
में
Faizan Faizi
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आप
ही
बस
ख़ास
रहबर
हैं
मिरे
कीजिए
सरकार
अब
नज़रे
करम
है
बड़ी
हसरत
कि
आक़ा
एक
दिन
आप
का
दीदार
हो
देखूंँ
हरम
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Faizan Faizi
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हम
तुम्हारे
इश्क़
के
इमकान
में
फूल
लेकर
हैं
खड़े
मैदान
में
बात
को
समझो
अनाएँ
छोड़
दो
रूठ
के
बैठो
न
यूँँ
मुल्तान
में
फूल
से
ख़ुश्बू
जुदा
होने
लगी
रख
दिए
थे
आप
जब
गुलदान
में
एक
दिन
देखा
किसी
के
साथ
में
हँस
रही
थी
बैठ
कर
दालान
में
जा
चुके
जो
लोग
फिर
आते
नहीं
है
यही
फ़ितरत
यहाँ
इंसान
में
पूछना
था
क्या
हुआ
था
उस
घड़ी
रो
रहे
थे
लोग
जब
ज़िंदान
में
इक
तरफ़
रख
दो
सभी
रंगीनियांँ
इक
तरफ़
ग़म
को
रखो
मीजा़न
में
दोस्त
मेरे
हैं
सभी
अच्छे
मगर
नाम
उनका
दर्ज
है
शैतान
में
जब
ग़रीबों
की
मदद
करना
कभी
याद
मत
रखना
उसे
एहसान
में
कुछ
नहीं
हासिल
हुआ
मुझ
को
यहाँ
कट
रही
है
उम्र
बस
नुक़सान
में
आसमाँ
पे
जब
बुलाना
हो
ख़ुदा
मौत
से
कहना
मिले
रमज़ान
में
देख
लो
बेहतर
किसी
भी
जान
में
कुछ
नहीं
है
ख़ूबियाँ
फैजा़न
में
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Faizan Faizi
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अली
के
चाहने
वालों
को
देखो
लगाए
भीड़
हैं
करबल
में
बैठे
Faizan Faizi
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गले
लग
कर
बताना
है
तुम्हें
अब
कि
रस्मन
ईद
पर
मिलते
सभी
हैं
Faizan Faizi
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