vo jitne door hain utne hi mere paas bhi hain | वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं

  - Faiz ul Hasan Khayal
वोजितनेदूरहैंउतनेहीमेरेपासभीहैं
येऔरबातहैख़ुशहैंमगरउदासभीहैं
येदेखनाहैहमेंकिसकाज़ौक़कैसाहै
यहाँशराबभीहैज़हरकेगिलासभीहैं
उन्हींपेतोहमत-ए-दीवानगीलगातेहो
जोइत्तिफ़ाक़सेमहफ़िलमेंरू-शनासभीहैं
जोरौशनीकेलिबादेकोओढ़करआए
शब-ए-सियाहकेवोमातमीलिबासभीहैं
तुमअपनेशहरमेंअम्न-ओ-अमाँकीबातकरो
जहाँसुकूँहैवहाँलोगबद-हवासेभीहैं
ग़ज़लकेसाज़हैंफ़ैज़-उल-हसन-'ख़याल'जहाँ
वहाँपेआहब-लबभीहैंमहव-ए-यासभीहैं
  - Faiz ul Hasan Khayal
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