ye jafa-e-gham ka chaara vo najaat-e-dil ka aalam | ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम

  - Faiz Ahmad Faiz
येजफ़ा-ए-ग़मकाचारावोनजात-ए-दिलकाआलम
तिराहुस्नदस्त-ए-ईसातिरीयादरू-ए-मर्यम
दिलजाँफ़िदा-ए-राहेकभीकेदेखहमदम
सर-ए-कू-ए-दिल-फ़िगाराँशब-ए-आरज़ूकाआलम
तिरीदीदसेसिवाहैतिरेशौक़मेंबहाराँ
वोचमनजहाँगिरीहैतिरेगेसुओंकीशबनम
येअजबक़यामतेंहैंतिरेरहगुज़रमेंगुज़राँ
हुआकिमरमिटेंहमहुआकिजीउठेंहम
लोसुनीगईहमारीयूँँफिरेहैंदिनकिफिरसे
वहीगोशा-ए-क़फ़सहैवहीफ़स्ल-ए-गुलकामातम
  - Faiz Ahmad Faiz
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