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Fahmi Badayuni
sahaare jaane-pahchaane banaa luun
sahaare jaane-pahchaane banaa luun | सहारे जाने-पहचाने बना लूँ
- Fahmi Badayuni
सहारे
जाने-पहचाने
बना
लूँ
सुतूनों
पर
तिरे
शाने
बना
लूँ
इजाज़त
हो
तो
अपनी
शा'इरी
से
तिरे
दो
चार
दीवाने
बना
लूँ
तिरा
साया
पड़ा
था
जिस
जगह
पर
मैं
उस
के
नीचे
तह-ख़ाने
बना
लूँ
तिरे
मोज़े
यहीं
पर
रह
गए
हैं
मैं
इन
से
अपने
दस्ताने
बना
लूँ
अभी
ख़ाली
न
कर
ख़ुद
को
ठहर
जा
मैं
अपनी
रूह
में
ख़ाने
बना
लूँ
- Fahmi Badayuni
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मेरे
नाम
से
क्या
मतलब
है
तुम्हें
मिट
जाएगा
या
रह
जाता
है
जब
तुम
ने
ही
साथ
नहीं
रहना
फिर
पीछे
क्या
रह
जाता
है
मेरे
पास
आने
तक
और
किसी
की
याद
उसे
खा
जाती
है
वो
मुझ
तक
कम
ही
पहुँचता
है
किसी
और
जगह
रह
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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तेग़-बाज़ी
का
शौक़
अपनी
जगह
आप
तो
क़त्ल-ए-आम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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सब
कर
लेना
लम्हे
ज़ाया'
मत
करना
ग़लत
जगह
पर
जज़्बे
ज़ाया'
मत
करना
Ali Zaryoun
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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धोखा
है
इक
फ़रेब
है
मंज़िल
का
हर
ख़याल
सच
पूछिए
तो
सारा
सफ़र
वापसी
का
है
Rajesh Reddy
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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सीने
लगाऊँ
ग़ैर
को
तो
पूछता
है
दिल
किसकी
जगह
थी
और
ये
सीने
पे
कौन
है
Ankit Maurya
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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मंज़िल
मिली
तो
उसकी
कमी
हमको
खा
गई
सामान
रास्ते
में
जो
खोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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ख़ूँ
पिला
कर
जो
शे'र
पाला
था
उस
ने
सर्कस
में
नौकरी
कर
ली
Fahmi Badayuni
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याद
रखने
में
ही
भलाई
है
मर
भी
सकते
हैं
भूलने
में
उसे
Fahmi Badayuni
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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चारासाज़ों
के
बस
की
बात
नहीं
मैं
दवाओं
के
बस
की
बात
नहीं
चाहता
हूँ
मैं
दीमकों
से
नजात
जो
किताबों
के
बस
की
बात
नहीं
तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
ख़त्म
कर
दे
अज़ाब
क़ब्रों
का
ताजमहलों
के
बस
की
बात
नहीं
आँसुओं
में
जो
झिलमिलाहट
है
वो
सितारों
के
बस
की
बात
नहीं
ऐसा
लगता
है
अब
तेरा
दीदार
सिर्फ़
आँखों
के
बस
की
बात
नहीं
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Fahmi Badayuni
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वो
कहीं
था
कहीं
दिखाई
दिया
मैं
जहाँ
था
वहीं
दिखाई
दिया
ख़्वाब
में
इक
हसीं
दिखाई
दिया
वो
भी
पर्दा-नशीं
दिखाई
दिया
जब
तलक
तू
नहीं
दिखाई
दिया
घर
कहीं
का
कहीं
दिखाई
दिया
रोज़
चेहरे
ने
आइने
बदले
जो
नहीं
था
नहीं
दिखाई
दिया
बद-मज़ा
क्यूँँ
हैं
आसमाँ
वाले
मैं
ज़मीं
था
ज़मीं
दिखाई
दिया
उस
को
ले
कर
चली
गई
गाड़ी
फिर
हमें
कुछ
नहीं
दिखाई
दिया
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Fahmi Badayuni
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