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Fahmi Badayuni
koi milta nahin KHuda ki tarah
koi milta nahin KHuda ki tarah | कोई मिलता नहीं ख़ुदा की तरह
- Fahmi Badayuni
कोई
मिलता
नहीं
ख़ुदा
की
तरह
फिरता
रहता
हूँ
मैं
दु'आ
की
तरह
ग़म
तआक़ुब
में
हैं
सज़ा
की
तरह
तू
छुपा
ले
मुझे
ख़ता
की
तरह
है
मरीज़ों
में
तज़्किरा
मेरा
आज़माई
हुई
दवा
की
तरह
हो
रहीं
हैं
शहादतें
मुझ
में
और
मैं
चुप
हूँ
कर्बला
की
तरह
जिस
की
ख़ातिर
चराग़
बनता
हूँ
घूरता
है
वही
हवा
की
तरह
वक़्त
के
गुम्बदों
में
रहता
हूँ
एक
गूँजी
हुई
सदा
की
तरह
- Fahmi Badayuni
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मेरा
हाथ
पकड़
ले
पागल,
जंगल
है
जितना
भी
रौशन
हो
जंगल,
जंगल
है
Umair Najmi
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किसी
के
होठ
समुंदर
में
भी
तरसते
रहे
किसी
की
प्यास
को
सहरा
में
मिल
गया
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
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वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
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मैं
अपने
बाप
के
सीने
से
फूल
चुनता
हूँ
सो
जब
भी
साँस
थमी
बाग़
में
टहल
आया
Hammad Niyazi
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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पहले
उसकी
ख़ुशबू
मैंने
ख़ुद
पर
तारी
की
फिर
मैंने
उस
फूल
से
मिलने
की
तैयारी
की
इतना
दुख
था
मुझको
तेरे
लौट
के
जाने
का
मैंने
घर
के
दरवाजों
से
भी
मुँह
मारी
की
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Tehzeeb Hafi
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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निगाहें
करती
रह
जाती
हैं
हिज्जे
वो
जब
चेहरे
से
इमला
बोलता
है
Fahmi Badayuni
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मेरी
पहली
नज़र
लौटा
दे
मुझ
को
तेरी
जानिब
दुबारा
देखना
है
Fahmi Badayuni
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बस
तुम्हारा
मकाँ
दिखाई
दिया
जिस
में
सारा
जहाँ
दिखाई
दिया
वो
वहीं
था
जहाँ
दिखाई
दिया
इश्क़
में
ये
कहाँ
दिखाई
दिया
उम्र
भर
पर
नहीं
मिले
हम
को
उम्र
भर
आसमाँ
दिखाई
दिया
रोज़
दीदा-वरों
से
कहता
हूँ
तू
कहाँ
था
कहाँ
दिखाई
दिया
अच्छे-ख़ासे
क़फ़स
में
रहते
थे
जाने
क्यूँँ
आसमाँ
दिखाई
दिया
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Fahmi Badayuni
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जो
मोहब्बत
लुटाया
करते
थे
वो
तराज़ू
ख़रीद
लाए
हैं
Fahmi Badayuni
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उसकी
जुल्फ़ें
उदास
हो
जाए
इस-क़दर
रोशनी
भी
ठीक
नहीं
तुमने
नाराज़
होना
छोड़
दिया
इतनी
नाराज़गी
भी
ठीक
नहीं
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Fahmi Badayuni
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