jaageer agar bahut na mili ham koon gham nahin | जागीर अगर बहुत न मिली हम कूँ ग़म नहीं

  - Faez Dehlvi
जागीरअगरबहुतमिलीहमकूँग़मनहीं
हासिलहमारेमुल्क-ए-क़नाअ'तकाकमनहीं
इससाथमह-रुख़ाँकोनहींकुछबराबरी
यूसुफ़सेयेनिगार-ए-परी-ज़ादकमनहीं
ख़ुश-सूरताँसेक्याकरूँँमैंआशनाईअब
मुझकोतोइनदिनोंमेंमुयस्सरदिरमनहीं
दिलबाँधतेनहींहैंहमारेमिलापपर
मह-तलअताँमेंमुझकोतोअबकुछभरमनहीं
मिलतेहोसबकेजाकेघरऔरहमसूँहोकनार
कुछहमतोउनचकोरोंसेमाहकमनहीं
ज़ाहिरकेदोस्तआतेनहींकामवक़्तपर
तलवारकाटक्याकरेजिसकोजोदमनहीं
'फ़ाएज़'कोभायामिस्रा-ए-'यकरंग'सजन
गरतुममिलोगेउनसेतीदेखोगेहमनहीं
  - Faez Dehlvi
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