har ek gaam pe aasoodagi kha | हर एक गाम पे आसूदगी खड़ी होगी

  - Ezaz Afzal
हरएकगामपेआसूदगीखड़ीहोगी
सफ़रकीआख़िरीमंज़िलबहुतकड़ीहोगी
येअपनेख़ूनकीलहरोंमेंडूबतीकश्ती
भँवरसेभागकेसाहिलपेजापड़ीहोगी
मुसाफ़िरोयेख़लिशनोक-ए-ख़ारकीतोनहीं
ज़रूरपाँवतलेकोईपंखुड़ीहोगी
तिरेख़ुलूस-ए-तहफ़्फ़ुज़मेंशकनहींलेकिन
हवामेंरेतकीदीवारगिरपड़ीहोगी
निज़ाम-ए-क़ैद-ए-मुसलसलमेंकैसीआज़ादी
खुलेजोपाँवतोहाथोंमेंहथकड़ीहोगी
तिरेफ़रारकीसरहदक़रीबथीलेकिन
मिरीतलाशज़रादूरजापड़ीहोगी
तुम्हारेदौर-ए-मुसलसलकीमुंज़बिततारीख़
हमारेरक़्स-ए-मुसलसलकीइककड़ीहोगी
मिरेगुमानकीबुनियादखोखलीनिकली
तिरेयक़ींकीइमारतकहाँखड़ीहोगी
  - Ezaz Afzal
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