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Eruj Mubarak
main samundar kinaare
main samundar kinaare | मैं समुंदर किनारे
- Eruj Mubarak
मैं
समुंदर
किनारे
आराम-कुर्सी
पर
धूप
सेंक
रहा
था
एक
लड़की
पानी
से
निकली
थकी
थकी
सी
सुस्ताने
को
बैठ
गई
न-जाने
उस
के
दिल
में
क्या
आया
बाएँ
पैर
पर
रेत
जमा
कर
पैर
बाहर
निकाल
घर
बनाया
मैं
हैरत-ए-शौक़
से
सब
देखता
रहा
मुझे
घर
अच्छा
लगा
उस
में
दाख़िल
हुआ
और
वो
समुंदर
वापस
चली
गई
मीरा-जी
अब
'इरुज'
क्या
करे
- Eruj Mubarak
लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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घर
में
ठंडे
चूल्हे
पर
अगर
ख़ाली
पतीली
है
बताओ
कैसे
लिख
दूँ
धूप
फागुन
की
नशीली
है
Adam Gondvi
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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दिसंबर
की
सर्दी
है
उसके
ही
जैसी
ज़रा
सा
जो
छू
ले
बदन
काँपता
है
Amit Sharma Meet
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तेरी
यादों
की
धूप
आने
लगी
है
अभी
खुल
जाएगा
मौसम
हमारा
Subhan Asad
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गर्मी
लगी
तो
ख़ुद
से
अलग
हो
के
सो
गए
सर्दी
लगी
तो
ख़ुद
को
दोबारा
पहन
लिया
Bedil Haidri
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मैं
बहुत
ख़ुश
था
कड़ी
धूप
के
सन्नाटे
में
क्यूँँ
तेरी
याद
का
बादल
मेरे
सर
पर
आया
Ahmad Mushtaq
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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सर्दी
है
कि
इस
जिस्म
से
फिर
भी
नहीं
जाती
सूरज
है
कि
मुद्दत
से
मिरे
सर
पर
खड़ा
है
Fakhr Zaman
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