kahaan sabat-e-gham-e-dil kahaan saraab-e-sukoon | कहाँ सबात-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ सराब-ए-सुकूँ

  - Ejaz Warsi
कहाँसबात-ए-ग़म-ए-दिलकहाँसराब-ए-सुकूँ
वोख़ुश-नसीबहैमिलजाएजिसकोसोज़-ए-दरूँ
ख़ुदआपदेखलेंक्याहालदिलज़बाँसेकहूँ
अभीतोहैंमिरीआँखोंमेंचंदक़तरा-ए-ख़ूँ
येशहर-ए-हम-नफ़साँकितनीबारउजड़ाहै
कभीहोसकालेकिनसर-ए-हयातनिगूँ
अभीतोमस्लहत-ए-वक़्तहीपेनाज़ाँहै
अभीख़िरदकोमुयस्सरकहाँमक़ाम-ए-जुनूँ
निगाहनीचीकिएमुन्फ़इलसेबैठेहैं
अबउनसेशिकवा-ए-बेदादकिसज़बाँसेकरूँँ
निखारहीगयाख़ुश्कख़ुश्कचेहरोंपर
मिलातोगिर्या-ए-शबनमसेकुछगुलोंकोसुकूँ
दर-अस्लहैमिरीहस्तीकीकाएनात'एजाज़'
वोइकनिगाहजिसेज़िंदगीकाराज़कहूँ
  - Ejaz Warsi
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