jo ja chuke hain ghaliban utren kabhi zeena tira | जो जा चुके हैं ग़ालिबन उतरें कभी ज़ीना तिरा

  - Ejaz Obaid
जोजाचुकेहैंग़ालिबनउतरेंकभीज़ीनातिरा
कहकशाँकहकशाँरौशनरहेरस्तातिरा
ख़ूँ-नाबा-ए-दिलकीकशीदआख़िरकोतिरेदमसेहै
कहनेकोमेरामय-कदालेकिनहैमय-ख़ानातिरा
पल-भरमेंबादलछागएऔरख़ूबबरसातेंहुईं
कलचौदहवींकीरातमेंकुछयूँँख़यालआयातिरा
ज़िंदगीज़िंदगीकुछरौशनीकुछरौशनी
चलारहाथाशहरमेंमुद्दतसेदीवानातिरा
अबगायकोंमेंनामहैवर्नाजोअपनेगीतथे
सारेदिलकेज़ख़्मथेदर-अस्लएहसाँथातिरा
ग़ज़लेंमिरीतेरेलिएयादेंतिरीमेरेलिए
येइश्क़हैपूँजीमिरीयेशे'रसरमायातिरा
  - Ejaz Obaid
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