qaafila utara sehra men aur pesh vahii manzar aa.e | क़ाफ़िला उतरा सहरा में और पेश वही मंज़र आए

  - Ejaz Gul
क़ाफ़िलाउतरासहरामेंऔरपेशवहीमंज़रआए
राखउड़ीख़ेमा-गाहोंकीख़ूनमेंलुथड़ेसरआए
गलियोंमेंघमसानकारनहैम'अरकादस्त-ब-दस्तहैयाँ
जिसेभीख़ुदपरनाज़बहुतहोआँगनसेबाहरआए
इकआसेबसालहराताहैबस्तीकीशह-राहोंपर
शामढलेजोघरसेनिकलेलौटकेफिरनहींघरआए
दिनोंमहीनोंआँखेंरोईंनईरुतोंकीख़्वाहिशमें
रुतबदलीतोसूखेपत्तेदहलीज़ोंमेंदरआए
एकदियारौशनरखनादीवारपेचाँदसितारोंसा
अब्रउठेबारिशबरसेयाहवाओंकालश्करआए
वर्नाकिसनेपारकियाथारस्ताभरीदोपहरोंका
कुछहमसेदीवानेथेजोतययेमसाफ़तकरआए
  - Ejaz Gul
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy