kabhi qataar se baahar kabhi qataar ke beech | कभी क़तार से बाहर कभी क़तार के बीच

  - Ejaz Gul
कभीक़तारसेबाहरकभीक़तारकेबीच
मैंहिज्र-ज़ादहुआख़र्चइंतिज़ारकेबीच
बनाहुआहैत'अल्लुक़साउस्तुवारीका
मिरेतवाफ़सेइसमेहवरमदारकेबीच
किआताजातारहेअक्स-ए-हैरतीइसमें
बिछादियागयाआईनाआर-पारकेबीच
हवाकेखेलमेंशिरकतकेवास्तेमुझको
ख़िज़ाँनेशाख़सेफेंकाहैरहगुज़ारकेबीच
येमैंहूँतूहैहयूलाहैहरमुसाफ़िरका
जोमिटरहाहैथकनसेउधरग़ुबारकेबीच
कोईलकीरसीपानीकीझिलमिलातीहै
कभीकभीमिरेमतरूकआबशारकेबीच
मैंउम्रकोतोमुझेउम्रखींचतीहैउलट
तज़ादसम्तकाहैअस्पऔरसवारकेबीच
  - Ejaz Gul
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