vo teergii bhi ajeeb thii | वो तीरगी भी अजीब थी

  - Ejaz Farooqi
वोतीरगीभीअजीबथी
चाँदनीकीठंडीगुदाज़चादरसेसाराजंगललिपटरहाथा
गुलोंकेसद-रंग
धुँदलेधुँदलेसे
जैसेइकसीम-तनकेचेहरेकेशोख़ग़ाज़ेपे
आँसुओंकाग़ुबारहो
पेड़,मुंतज़िर
अपनीनर्मशाख़ोंकेहाथफैलाए
औरकभीकोईशाख़चटकी
तोसाएनिकले
मुलूकफूलोंकोचूमकर
चाँदनीकीचादरपेनाचतेथे
कहाँसेआई
वोइककिरन
जिसनेफैलतीतीरगीकीगँभीरताकोचीरा
तोमेरेभीतरमेंएककिरनोंकासिलसिलायूँँउतररहाथा
किकोह-ए-आतिश-फ़शाँसेलावानशेबकोबहरहाहो
मेरेलहूसेसोजउबलपड़े
जिनकीतेज़हिद्दतसेतीरगीकेमुहीबयख़-बस्तासंगपिघले
तोनूरकेरास्तोंकाइकजालखुलगया
मगरअभीतोमुहीबकालेपहाड़कुछऔरभीनज़ररहेहैं
औरमैंसफ़रकीहिद्दतसेजलरहाहूँ
ज़रामैंअबचाँदनीकीठंडीगुदाज़-चादरमें
दमतोलेलूँ
कहींउबलतीहुईयेआतिश
मुझेजलाकरभस्मकरदे
  - Ejaz Farooqi
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