har ik tahreer nafrat ki mitaana chahta hooñ main | हर इक तहरीर नफ़रत की मिटाना चाहता हूँ मैं

  - Ejaz Ansari
हरइकतहरीरनफ़रतकीमिटानाचाहताहूँमैं
मोहब्बतहीमोहब्बतकाफ़सानाचाहताहूँमैं
फ़सीलेंनफ़रतोंकीसबगिरानाचाहताहूँमैं
अमीर-ए-शहरकालेकिनइशाराचाहताहूँमैं
अँधेरीरातमेंसूरजउगानाचाहताहूँमैं
चराग़ोंमेंलहूअपनाजलानाचाहताहूँमैं
फ़लकछूतेमकानोंकीहवसतुमकोमुबारकहो
फ़क़तसरकोछुपानेकाठिकानाचाहताहूँमैं
फ़सादोंसेकिसीभीक़ौमकोअज़्मतनहींमिलती
अमीर-ए-क़ौमकोइतनाबतानाचाहताहूँमैं
नईतहज़ीबकाकोईगिला-शिकवानहींमुझको
मगरअपनेबुज़ुर्गोंकाज़मानाचाहताहूँमैं
कोईसूरतनहींहालातकेतब्दीलहोनेकी
अगरचेखुलकेहँसनामुस्कुरानाचाहताहूँमैं
जहाँ'एजाज़'हरचेहरेपेशादाबीनज़रआए
वहीमौसमवहीमंज़रसुहानाचाहताहूँमैं
  - Ejaz Ansari
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