zamaane ki sataai KHud-kushi hai | ज़माने की सताई ख़ुद-कुशी है

  - Ejaaz tawakkal
ज़मानेकीसताईख़ुद-कुशीहै
मोहब्बतइब्तिदाईख़ुद-कुशीहै
जहाँसफ़्फ़ाकआँखेंघातमेंहों
वहाँचेहरा-नुमाईख़ुद-कुशीहै
मैंरायइश्क़परअबऔरक्यादूँ
कहातोहैकिभाईख़ुद-कुशीहै
मैंउसकोफूलदेकरख़ुशनहींहूँ
कियेभीदिल-रुबाईख़ुद-कुशीहै
येइस्ति'मालकरनेपरखुलाहै
किख़ुशबूकीमयाईख़ुद-कुशीहै
शिकारीघातमेंबैठाहोतोफिर
परिंदेकीरिहाईख़ुद-कुशीहै
किसीतितलीकामरजानाअज़ीज़ो
हक़ीक़तमेंनिसाईख़ुद-कुशीहै
  - Ejaaz tawakkal
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