chubhan se dard se qurbat badha raha hai koi | चुभन से दर्द से क़ुर्बत बढ़ा रहा है कोई

  - Ehtimam Sadiq
चुभनसेदर्दसेक़ुर्बतबढ़ारहाहैकोई
दयार-ए-दिलसेकहींदूरजारहाहैकोई
समुंदरोंसेकहोकश्तियाँडुबोडालें
हमारीमौतकेक़िस्सेसुनारहाहैकोई
उसेबताओख़ुशीदेरतकनहींरहती
मिरेग़मोंपेबहुतमुस्कुरारहाहैकोई
मिराहीनामनहींहैमिरीकहानीमें
किमुझसेज़ातकोमेरीछुपारहाहैकोई
किसीकीयादकेजालेहैंमेरेहुजरेमें
उदासियोंसेमिराघरसजारहाहैकोई
तमाम-शहरमेंइकघरयहीथाउल्फ़तका
यहाँभीमौतकाबिस्तरबिछारहाहैकोई
मिरेलहूकोछिड़कदोतमामगुलशनमें
मिरीवफ़ाओंपेउँगलीउठारहाहैकोई
मैंउससेबाततोकरलूँरुकोज़रा'सादिक़'
मिरेदरोंसेसदाएँलगारहाहैकोई
  - Ehtimam Sadiq
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