zindagi to qaid hai aur pardaa-e-mahfil men hai | ज़िंदगी तो क़ैद है और पर्दा-ए-महफ़िल में है

  - Ehsan Jafri
ज़िंदगीतोक़ैदहैऔरपर्दा-ए-महफ़िलमेंहै
आरज़ूहुस्न-ए-ज़मींकीगोशा-ए-ग़ाफ़िलमेंहै
ढूँढताहैतूजिसेवोजुस्तुजूमेरीभीहै
मक़्सद-ए-अहल-ए-नज़रतोएकहीमंज़िलमेंहै
बंदिश-ए-कौन-ओ-मकाँपरवाज़मेंहाइलनहीं
हासिल-ए-जहद-ओ-अमलतोजज़्बा-ए-कामिलमेंहै
ज़ुल्मकीतारीकियोंकोजुम्बिश-ए-लबसैल-ए-नूर
बोलकिहैवक़्ततेराजोभीतेरेदिलमेंहै
जाँ-फ़िशानीओसकीऔरमिट्टीकीतलब
क्याबुझेगीप्यासलेकिनकुछनमीतोदिलमेंहै
  - Ehsan Jafri
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