कभीकभीजोवोग़ुर्बत-कदेमेंआएहैं
मिरेबहेहुएआँसूजबींपेलाएहैं
नसरगुज़िश्त-ए-सफ़रपूछमुख़्तसरयेहै
किअपनेनक़्श-ए-क़दमहमनेख़ुदमिटाएहैं
नज़रनतोड़सकीआँसुओंकीचिलमनको
वोरोज़अगरचेमिरेआईनेमेंआएहैं
उसएकशम्असेउतरेहैंबाम-ओ-दरकेलिबास
उसएकलौनेबड़ेफूल-बनजलाएहैं
येदोपहरयेज़मींपरलिपाहुआसूरज
कहींदरख़्तनदीवार-ओ-दरकेसाएहैं
कलीकलीमेंहैधरतीकेदूधकीख़ुशबू
तमामफूलउसीएकमाँकेजाएहैं
नज़रख़लाओंपेऔरइंतिज़ारबे-वा'दा
ब-ईंअमलभीवोआँखोंमेंझिलमिलाएहैं
फ़ुसून-ए-शेरसेहमउसमह-ए-गुरेज़ाँको
ख़लाओंसेसर-ए-काग़ज़उतारलाएहैं
रिसालाहाथसेरखतेनक्यूँँवोशर्माकर
ग़ज़लपढ़ीहैतोहमसामनेभीआएहैं
चलेहैंख़ैरसेउनकोपुकारने'दानिश'
मगरवोयूँँतोनआएँगेऔरनआएहैं