judaai aur kya hai main jise sahta nahin rehta | जुदाई और क्या है मैं जिसे सहता नहीं रहता

  - Ehsan Akbar
जुदाईऔरक्याहैमैंजिसेसहतानहींरहता
येतुमसेरोज़कामिलना
जुदाहोनेसेपहलेदेरतक
इकबातसेइकबाततक
लफ़्ज़ोंकालुढ़काना
नएमौसमकीबातें
आलिमानागुफ़्तुगूएँउनमनाज़िरकी
सियासतजिनकाचेहराकलदिखाएगी
मुलाक़ातेंहैंऔरऐसीमुलाक़ातें
किबाहमरोज़कामिलनामिलना
कोईभीअर्ज़िशनहींरखता
येकैसावस्लहै
जिसमें
हदेंमिटतीनहीं
बातोंसेबातोंकामिलाना
मैंसेतूतककासफ़रभीबननहींपाता
येकैसेराब्तेहैं
कुर्सियोंसेकुर्सियाँमिलतीहैं
लेकिनदरमियानीफ़ासलेमिटतेनहीं
  - Ehsan Akbar
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