main us darakht ka bas aakhiri hi patta tha | मैं उस दरख़्त का बस आख़िरी ही पत्ता था

  - Dwijendra Dwij
मैंउसदरख़्तकाबसआख़िरीहीपत्ताथा
जिसेहमेशाहवाकेख़िलाफ़लड़नाथा
मैंज़िंदगीमेंकभीइसक़दरभटकाथा
किजबज़मीरमुझेरस्तादिखाताथा
मशीनबनतोचुकाहूँमगरनहींभूला
किमेरेजिस्ममेंदिलभीकभीधड़कताथा
वोबच्चाखोगयादुनियाकीभीड़मेंकबका
हसीनख़्वाबोंकीजोतितलियाँपकड़ताथा
फिरउसकेबा'दपरिंदोंपेजानेक्यागुज़री
मैंएकपेड़कीशाख़ोंकोकाटआयाथा
तमाम-उम्रवोआयानहींज़मींपेकभी
हवामेंउसनेजोसिक्काजोकभीउछालाथा
मिरावजूदभीशामिलथाउसकीमिट्टीमें
मिराभीखेतकीफ़स्लोंमेंकोईहिस्साथा
जनेकितनीसुरंगेंनिकलगईंउससे
खड़ापहाड़भीतोआँखकाहीधोकाथा
जोबातबातपेखातारहाख़ुदाकीक़सम
क़समख़ुदाकीवहीआदमीतोझूटाथा
पताकरोकिअभीवोबड़ाहुआकिनहीं
बड़ेदरख़्तकेनीचेजोनन्हापौदाथा
उसएकशे'रपेआँखेंचमकउठीउसकी
वोशे'रजिसमेंकिरोटीकाज़िक्रआयाथा
हमारीज़िंदगीथीइकतलाशपानीकी
जहाँपेरेतका'द्विज'एकछनतादरियाथा
  - Dwijendra Dwij
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