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Jay kishan
us ke maathe par hont rakhe to ehsaas hua mujh ko
us ke maathe par hont rakhe to ehsaas hua mujh ko | उस के माथे पर होंट रखे तो एहसास हुआ मुझ को
- Jay kishan
उस
के
माथे
पर
होंट
रखे
तो
एहसास
हुआ
मुझ
को
पारस
को
छू
कर
पत्थर
सोना
कैसे
बन
जाता
है
- Jay kishan
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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फ़िक्र-ए-ईजाद
में
गुम
हूँ
मुझे
ग़ाफ़िल
न
समझ
अपने
अंदाज़
पर
ईजाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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कुछ
समझ
में
मिरी
नहीं
आता
दिल
लगाने
से
फ़ाएदा
क्या
है
Anwar Taban
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ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
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लोग
औरत
को
फ़क़त
जिस्म
समझ
लेते
हैं
रुह
भी
होती
है
उस
में
ये
कहाँ
सोचते
हैं
Sahir Ludhianvi
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देख
कर
हर
कोई
बेकार
समझ
ले
मुझ
को
अपनी
उल्फ़त
में
गिरफ़्तार
समझ
ले
मुझ
को
बिना
उसके
तिरी
जन्नत
मुझे
मंज़ूर
नहीं
तू
मिरी
मान
गुनहगार
समझ
ले
मुझ
को
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Faiz Ahmad
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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मुझ
को
न
अब
शैतान
से
डर
लगता
है
इंसान
हूँ
इंसान
से
डर
लगता
है
किस
को
ख़बर
किस
हाथ
है
ख़ंजर
रखा
हर
हाथ
की
पहचान
से
डर
लगता
है
जाना
कहाँ
रुकना
कहाँ
हैरान
हूँ
चलते
हुए
अंजान
से
डर
लगता
है
किस
की
हँसी
का
हो
भरोसा
याँ
कि
अब
हर
शख़्स
की
मुस्कान
से
डर
लगता
है
मैं
किस
नज़र
किस
आँख
से
पर्दा
करूँँ
अब
मुझ
को
चश्म-ए-जान
से
डर
लगता
है
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Jay kishan
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इबादत
करूँँ
कैसे
अब
मैं
ख़ुदा
की
मेरे
सामने
तेरे
रुख़्सार
जो
हैं
मुझे
तो
कोई
अब
नज़र
भी
न
आता
मेरी
नज़रें
तेरी
गिरफ़्तार
जो
हैं
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Jay kishan
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तमाम
रात
गुज़ारी
है
जाग
कर
मैंने
परेशाँ
मैं
था
परेशानियाँ
गो
उसकी
थी
Jay kishan
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इतना
भी
क्या
दिल
दुखाना
चाहिए
शिकवों
को
अब
तो
भुलाना
चाहिए
तुम
अकेले
जीत
लोगे
ये
जहाँ
इस
गुमाँ
को
अब
गिराना
चाहिए
नुक़्स
तब
सारे
नज़र
आ
जाते
हैं
जाने
को
जब
इक
बहाना
चाहिए
ढूँढते
हैं
सब
मोहब्बत
हर
तरफ़
रोने
को
जब
एक
शाना
चाहिए
ख़ामुशी
वाले
ज़माने
अब
गए
इश्क़
जब
हो
तो
बताना
चाहिए
जिस
ने
अपनों
को
भी
पहचाना
नहीं
कहता
है
रिश्ता
निभाना
चाहिए
दुश्मनों
को
मात
देनी
है
अगर
दोस्त
तुमको
मुस्कुराना
चाहिए
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Jay kishan
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आदमी
तो
नहीं
ख़ुदा
हूँ
मैं
इल्म
है
मुझ
को
इस
भरम
का
भी
Jay kishan
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