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Jay kishan
itnaa bhi kya dil dukhaana chahiye
itnaa bhi kya dil dukhaana chahiye | इतना भी क्या दिल दुखाना चाहिए
- Jay kishan
इतना
भी
क्या
दिल
दुखाना
चाहिए
शिकवों
को
अब
तो
भुलाना
चाहिए
तुम
अकेले
जीत
लोगे
ये
जहाँ
इस
गुमाँ
को
अब
गिराना
चाहिए
नुक़्स
तब
सारे
नज़र
आ
जाते
हैं
जाने
को
जब
इक
बहाना
चाहिए
ढूँढते
हैं
सब
मोहब्बत
हर
तरफ़
रोने
को
जब
एक
शाना
चाहिए
ख़ामुशी
वाले
ज़माने
अब
गए
इश्क़
जब
हो
तो
बताना
चाहिए
जिस
ने
अपनों
को
भी
पहचाना
नहीं
कहता
है
रिश्ता
निभाना
चाहिए
दुश्मनों
को
मात
देनी
है
अगर
दोस्त
तुमको
मुस्कुराना
चाहिए
- Jay kishan
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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जिस
पर
हमारी
आँख
ने
मोती
बिछाए
रात
भर
भेजा
वही
काग़ज़
उसे
हम
ने
लिखा
कुछ
भी
नहीं
Bashir Badr
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आईने
आँख
में
चुभते
थे
बिस्तर
से
बदन
कतराता
था
एक
याद
बसर
करती
थी
मुझे
मैं
साँस
नहीं
ले
पाता
था
Tehzeeb Hafi
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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मुयस्सर
हमें
ख़्वाब-ओ-राहत
कहाँ
ज़रा
आँख
झपकी
सहर
हो
गई
Dagh Dehlvi
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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पुतलियाँ
तक
भी
तो
फिर
जाती
हैं
देखो
दम-ए-नज़अ
वक़्त
पड़ता
है
तो
सब
आँख
चुरा
जाते
हैं
Ameer Minai
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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उस
के
माथे
पर
होंट
रखे
तो
एहसास
हुआ
मुझ
को
पारस
को
छू
कर
पत्थर
सोना
कैसे
बन
जाता
है
Jay kishan
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उस
को
मैं
दुल्हन
बना
लाऊँ
मिरे
बस
में
नहीं
रब्बा
मेरे
उस
की
हाँ
भी
चाहिए
इस
के
लिए
Jay kishan
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इबादत
करूँँ
कैसे
अब
मैं
ख़ुदा
की
मेरे
सामने
तेरे
रुख़्सार
जो
हैं
मुझे
तो
कोई
अब
नज़र
भी
न
आता
मेरी
नज़रें
तेरी
गिरफ़्तार
जो
हैं
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Jay kishan
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हम
ने
समझाया
है
दुनिया
को
ये
दोस्ती
जीना
भी
है
मरना
भी
यारी
में
जान
गए
हम
सब
कुछ
दुनिया
में
हँसना
भी
है
रोना
भी
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Jay kishan
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मुझ
को
न
अब
शैतान
से
डर
लगता
है
इंसान
हूँ
इंसान
से
डर
लगता
है
किस
को
ख़बर
किस
हाथ
है
ख़ंजर
रखा
हर
हाथ
की
पहचान
से
डर
लगता
है
जाना
कहाँ
रुकना
कहाँ
हैरान
हूँ
चलते
हुए
अंजान
से
डर
लगता
है
किस
की
हँसी
का
हो
भरोसा
याँ
कि
अब
हर
शख़्स
की
मुस्कान
से
डर
लगता
है
मैं
किस
नज़र
किस
आँख
से
पर्दा
करूँँ
अब
मुझ
को
चश्म-ए-जान
से
डर
लगता
है
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Jay kishan
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