agar likhna man' hai to qalam ka kaar-kh | अगर लिखना मनअ' है तो क़लम का कार-ख़ाना क्यूँ

  - Dr. Rakesh Joshi
अगरलिखनामनअ'हैतोक़लमकाकार-ख़ानाक्यूँ
अगरपढ़नामनअ'हैतोयहाँकाग़ज़बनानाक्यूँ
इसीदुनियामेंबेहतरइकनईदुनियाबसानेको
यहाँतकगएहैंतोयहाँसेलौटजानाक्यूँ
वहाँलेकरहीक्यूँआयाजहाँफिसलनहीफिसलनहै
येजनताहीनहींसमझीतूराजाहैतोमानाक्यूँ
कईबरसोंसेइसपरहीबहसजारीहैसंसदमें
जोभेजाएकरुपयाथातोपहुँचाएकआनाक्यूँ
तुम्हेंगरआसमाँकीसैरकरनीथीतोकरलेते
कहींपरबाढ़-सूखेकाहीहरदमयूँँबहानाक्यूँ
अगरजंगलकोफिरसेएकदिनजंगलबनानाथा
यहाँकरशहरमेंफिरबनायाआशियानाक्यूँ
  - Dr. Rakesh Joshi
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