tujh pe dono nisaar hain qaateel | तुझ पे दोनों निसार हैं क़ातिल

  - Dr. Naresh
तुझपेदोनोंनिसारहैंक़ातिल
जान-ए-मुज़्तरहोयादिल-ए-बिस्मिल
क़हरहैक़हर-ए-इश्क़कीमंज़िल
हरक़दमआगहैनईमुश्किल
होगएदेखकरवोआईना
अपनीसूरतपेआपहीमाइल
ग़मसेआज़ादकरदियाहमको
क्यूँपीर-ए-मुग़ाँकेहोंक़ाइल
किसक़दरदिल-कुशाफ़ज़ाहोगी
आपजबहोंगेज़ीनत-ए-महफ़िल
आदमियतकोनाज़थाजिनपर
अबवोदानारहेवोआक़िल
चारा-साज़ीमरीज़-ए-उल्फ़तकी
आपकेवास्तेनहींमुश्किल
आरज़ूओंमेंमचगईहलचल
कौनयेयादगयादिल
तूउभारेजोहमकोपस्तीसे
तुझकोयारबनहींकोईमुश्किल
हाएजोबातभीकहीमैंने
ज़ेर-ए-लबतूनेकहदियामोहमिल
क्याभरोसाकरेंकिसीपे'नरेश'
आदमीआदमीकाहैक़ातिल
  - Dr. Naresh
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