ज़िक्र-ए-माज़ीसेशब-ओ-रोज़सतातेहैंमुझे
मेरेअहबाबहीदीवानाबनातेहैंमुझे
मैंतोइकजुमला-ए-बा-मा'नी-ओ-बा-मतलबहूँ
औरवोहर्फ़-ए-ग़लतकहकेमिटातेहैंमुझे
एकबे-रब्तत'अल्लुक़कासहारालेकर
लोगक्याइश्क़केअंदाज़सिखातेहैंमुझे
जोथेअपनेहीख़द-ओ-ख़ालसेग़ाफ़िलकलतक
आजवोलोगभीआईनादिखातेहैंमुझे
कुछतबीअ'तहीबग़ावतकीतरफ़माइलहै
वर्नामयख़ानेकेआदाबतोआतेहैंमुझे
कुछत'अल्लुक़कोईनिस्बतनहींलेकिनफिरभी
ऐ'नरेश'आजसुनाहैकिबनातेहैंमुझे