kya kahooñ un ki nigaah-e-fitna-e-zaa kya kah gaii | क्या कहूँ उन की निगाह-ए-फ़ित्ना-ए-ज़ा क्या कह गई

  - Dr. Naresh
क्याकहूँउनकीनिगाह-ए-फ़ित्ना-ए-ज़ाक्याकहगई
लबतकआतेआतेदिलकीबातदिलमेंरहगई
ताब-ए-नज़्ज़ाराथीकिसकोजबवोआएबे-नक़ाब
दीदकीएकएकरुततोदिलमेंघुटकररहगई
कटगईशबरोतेरोतेइंतिज़ार-ए-यारमें
आरज़ूएकएकदिलकीअश्कबनकरबहगई
आपसेलबपरशिकायतभीकभीआईकहो
गोमिरीजान-ए-हज़ींसद
मेंहज़ारोंसहगई
सरगयातोक्याहुआहममिटगएतोक्या'नरेश'
आबरूतोकूचा-ए-क़ातिलमेंअपनीरहगई
  - Dr. Naresh
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