mujh ko khaamoshi-e-haalaat se dar lagta hai | मुझ को ख़ामोशी-ए-हालात से डर लगता है

  - Dr Amir Riyaz
मुझकोख़ामोशी-ए-हालातसेडरलगताहै
येमुझेदौर-ए-सियासतकाअसरलगताहै
बे-अमलमैंथामगररबनेमुझेबख़्शदिया
येमिरीमाँकीदु'आओंकाअसरलगताहै
जबसेवोदूरहुआहैमिरीइनआँखोंसे
दिलमिरादिलनहींउजड़ासानगरलगताहै
जबसेदेखाहैतुझेखोयाहुआरहताहूँ
येतिरीशोख़निगाहोंकाअसरलगताहै
हरतरफ़दर्दहैतारीकीउदासीहैबहुत
किसक़दरसख़्तयेसाँसोंकासफ़रलगताहै
''हरघड़ीदर्दकेपैवंदलगेजातेहैं''
येमुझेमेरेगुनाहोंकाअसरलगताहै
एकनक़्शऐसाबनायाहैतिरीयादोंने
ज़ेहनसेरूहतलकतेराहीघरलगताहै
  - Dr Amir Riyaz
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