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Divy Kamaldhwaj
dastaan-e-zindagi ke sirf kuchh kirdaar sach
dastaan-e-zindagi ke sirf kuchh kirdaar sach | दास्तान-ए-ज़िन्दगी के सिर्फ़ कुछ किरदार सच
- Divy Kamaldhwaj
दास्तान-ए-ज़िन्दगी
के
सिर्फ़
कुछ
किरदार
सच
झूठ
है
ज़ाती
मकाँ
और
सब
किराया-दार
सच
ये
ज़बाँ
खुलती
नहीं
वैसे
तो
सबके
सामने
पूछता
है
तो
बता
दूँगा
तुझे
दो-चार
सच
झूठ
कहना
छोड़
दूँगा
बस
मुझे
इतना
बता
कौन
अब
तक
कह
सका
हर
एक
को
हर
बार
सच
जो
ख़ुदा
को
चाहता
है
उसको
जन्नत
सच
लगे
और
काफ़िर
को
तो
लगता
है
यही
संसार
सच
- Divy Kamaldhwaj
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आगे
चलकर
जिस
सेे
शादी
करनी
हो
पहले
दिन
से
झूठ
नहीं
कहते
उस
सेे
Tanoj Dadhich
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ज़रा
सा
झूठ
ही
कह
दो
मेरे
बिन
तुम
अधूरे
हो
तुम्हारा
क्या
बिगड़ता
है
ज़रा
सी
बात
कहने
में
Parveen Shakir
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तुम
कभी
मुझको
कलेजे
से
लगाकर
आज़माना
झूठ
कहती
है
ये
दुनिया
आदमी
रोता
नहीं
है
Harsh saxena
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारी
फाइलों
में
गाँव
का
मौसम
गुलाबी
है
मगर
ये
आंकड़े
झूठे
हैं
ये
दावा
किताबी
है
Adam Gondvi
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तिरे
वादे
पर
जिए
हम
तो
ये
जान
झूट
जाना
कि
ख़ुशी
से
मर
न
जाते
अगर
ए'तिबार
होता
Mirza Ghalib
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दोनों
बिलकुल
झूठे
थे
दोनों
अब
तक
ज़िंदा
हैं
Sabeen Saif
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झूठों
ने
झूठों
से
कहा
है
सच
बोलो
सरकारी
एलान
हुआ
है
सच
बोलो
घर
के
अंदर
तो
झूठों
की
एक
मंडी
है
दरवाज़े
पर
लिखा
हुआ
है
सच
बोलो
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Rahat Indori
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अगर
उसको
शिकायत
है
तो
ये
तय
है
मुहब्बत
है
बड़ी
अच्छी
है
सुनने
में
मगर
झूठी
कहावत
है
Alankrat Srivastava
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मोहब्बत
जब
तलक
होती
नहीं
है
मोहब्बत
झूठ
लगती
है
सभी
को
Umesh Maurya
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धीरे
धीरे
कुछ
भी
आसाँ
नहीं
होता
धीरे
धीरे
बस
आदत
हो
जाती
है
Divy Kamaldhwaj
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पहले
कोई
कोशिश
करके
तो
देखे
हम
इतने
भी
सख़्त
नहीं
दुनिया
वालों
Divy Kamaldhwaj
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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मैं
दिलकश
हूँ
मगर
प्यारा
नहीं
हूँ।
ज़रा
सा
हूँ
मगर
सारा
नहीं
हूँ
।
मुझे
क्या
देखते
हो
इस
तरह
से,
मैं
दीवाना
हूँ
आवारा
नहीं
हूँ।
दिलासा
अपना
अपने
पास
रक्खो,
नहीं...हालात
का
मारा
नहीं
हूँ।
नज़र
से
माँ
की
मत
देखो
मुझे
मैं,
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
।
भरोसा
मुझ
पे
रक्खो
और
थोड़ा,
रुका
हूँ
मैं
मगर
हारा
नहीं
हूँ
।
मैं
पहले
प्यार
सा
लगता
हूँ
लेकिन,
नहीं
यारा...
नहीं
यारा...
नहीं
हूँ
!
-दिव्य
कमलध्वज
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Divy Kamaldhwaj
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और
बेहतर,
और
बेहतर,
और
बेहतर
का
ये
खेल
मुझ
सेे
मेरे
शे'र
की
मासूमियत
ले
जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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