मैंदिलकशहूँमगरप्यारानहींहूँ।
ज़रासाहूँमगरसारानहींहूँ।
मुझेक्यादेखतेहोइसतरहसे,
मैंदीवानाहूँआवारानहींहूँ।
दिलासाअपनाअपनेपासरक्खो,
नहीं...हालातकामारानहींहूँ।
नज़रसेमाँकीमतदेखोमुझेमैं,
तुम्हारीआँखकातारानहींहूँ।
भरोसामुझपेरक्खोऔरथोड़ा,
रुकाहूँमैंमगरहारानहींहूँ।
मैंपहलेप्यारसालगताहूँलेकिन,
नहींयारा...नहींयारा...नहींहूँ!
-दिव्यकमलध्वज