दिलमेंमिरेहज़ारअलमहीजवाँरहे
यारबमगरलबोंपेहँसीकासमाँरहे
मंज़िलकीजुस्तजूहैनराहोंकाइश्तियाक़
ऐदिलबलाकेसाथनअबकारवाँरहे
आँखेंभीआज़माईगईराह-ए-ज़ीस्तमें
क़ल्ब-ओ-जिगरभीमुब्तिला-ए-इम्तिहाँरहे
साहिलदिखाख़ुदायासफ़ीनाडुबोहीदे
कबतकहवासेमहव-ए-जदलबादबाँरहे
अपनीख़ुशीकाएकभीलम्हामिलेतोक्यूँँ
जबइख़्तियार-ए-ग़ैरमेंउम्र-ए-रवाँरहे
क्याइश्क़हैयहीकिरहेवोसितम-ज़रीफ़
औरमेरेलबपेनाला-ओ-आह-ओ-फ़ुग़ाँरहे
इकलम्हा-ए-अनानेजुदाकरदियाउन्हें
दोजिस्मथेजोऔरसदाएकजाँरहे
इकदिनमैंमुश्त-ए-ख़ाकतोहोजाऊँगीफ़ना
शायद'सबा'मता-ए-सुख़नजाविदाँरहे