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Dipendra Singh 'Raaz'
tum chhod ga.e to mujhe ehsaas hua ye
tum chhod ga.e to mujhe ehsaas hua ye | तुम छोड़ गए तो मुझे एहसास हुआ ये
- Dipendra Singh 'Raaz'
तुम
छोड़
गए
तो
मुझे
एहसास
हुआ
ये
हाथों
की
पकड़
मेरी
ही
मज़बूत
नहीं
थी
- Dipendra Singh 'Raaz'
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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इक
दूसरे
को
छोड़
के
जाने
की
बात
है
अपनी
नहीं
ये
सारे
ज़माने
की
बात
है
बस
यूँँ
समझ
लो
उन
सेे
मेरा
कद
बलंद
है
जिनके
लबों
पे
मुझको
गिराने
की
बात
है
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Kashif Sayyed
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उनकी
सोहबत
में
गए
सँभले
दोबारा
टूटे
हम
किसी
शख़्स
को
दे
दे
के
सहारा
टूटे
ये
अजब
रस्म
है
बिल्कुल
न
समझ
आई
हमें
प्यार
भी
हम
ही
करें
दिल
भी
हमारा
टूटे
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Vikram Gaur Vairagi
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अपना
कंगन
समझ
रही
हो
क्या
और
कितना
घुमाओगी
मुझ
को
Zubair Ali Tabish
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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हमें
हर
वक़्त
ये
एहसास
दामन-गीर
रहता
है
पड़े
हैं
ढेर
सारे
काम
और
मोहलत
ज़रा
सी
है
Khurshid Talab
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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जिस्म
के
पार
जाना
पड़ा
था
कभी
इश्क़
कर
के
हुई
बंदगी
की
समझ
Neeraj Neer
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रोकने
से
कभी
नहीं
रुकती
तेरी
यादें
भी
सांँस
जैसी
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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लगती
है
बहुत
ख़ाली
से
अब
ये
मेरी
आँखें
काजल
से
कहो
कोई
मेरी
आँख
में
आए
Dipendra Singh 'Raaz'
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आए
सही
वो
आए
भले
देर
से
यहाँ
कितनी
तो
देर
लगती
है
अजमेर
से
यहाँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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लौटा
न
वो
कभी
न
कभी
दर्द
कम
हुआ
अश्कों
के
चींखने
की
सदा
बेअसर
रही
मैंने
तमाम
उम्र
में
बस
की
थी
इक
दु'आ
मेरा
नसीब
वो
भी
दु'आ
बेअसर
रही
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Dipendra Singh 'Raaz'
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इज़्ज़त-ओ-आबरू
के
डर
से
फिर
इक
वालिद
ने
अपनी
बेटी
की
मोहब्बत
का
गला
घोंट
दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
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