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Dipendra Singh 'Raaz'
satah se tah talak hona padega gark hi tumko
satah se tah talak hona padega gark hi tumko | सतह से तह तलक होना पड़ेगा गर्क ही तुमको
- Dipendra Singh 'Raaz'
सतह
से
तह
तलक
होना
पड़ेगा
गर्क
ही
तुमको
समुंदर
के
किनारे
पर
कभी
मोती
नहीं
मिलते
- Dipendra Singh 'Raaz'
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रखते
हैं
मोबाइल
में
मोहब्बत
की
निशानी
अब
फूल
किताबों
में
छुपाया
नहीं
करते
Meharban Amrohvi
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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जहाँ
सारे
हवा
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
वहाँ
भी
हम
दिया
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
Abbas Qamar
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
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लम्स
उसका
इस
क़दर
महसूस
होता
है
मुझे
हो
कोई
नाराज़
तितली
फूल
पर
बैठी
हुई
फ़िल्म
में
शायद
बिछड़ने
का
कोई
अब
सीन
है
और
मेरे
हाथ
को
वो
थाम
कर
बैठी
हुई
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Sunny Seher
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ईद
पर
सब
फूल
लेकर
आ
रहे
हैं
हो
गए
हैं
ज़िंदगी
के
ख़त्म
रमज़ान
Aves Sayyad
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नए
दौर
के
नए
ख़्वाब
हैं
नए
मौसमों
के
गुलाब
हैं
ये
मोहब्बतों
के
चराग़
हैं
इन्हें
नफ़रतों
की
हवा
न
दे
Bashir Badr
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लम्स
दिल
पर
है
तुम्हारा
मेरे
मैंने
आँखों
से
छुआ
है
तुमको
Dipendra Singh 'Raaz'
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लगती
है
बहुत
ख़ाली
से
अब
ये
मेरी
आँखें
काजल
से
कहो
कोई
मेरी
आँख
में
आए
Dipendra Singh 'Raaz'
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वो
सदा
जो
कान
तक
पहुंँची
नहीं
शहर
भर
में
ढूंँढते
हैं
हम
उसे
Dipendra Singh 'Raaz'
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हिज्र
का
फर्ज़
निभाया
है
मैं
ने
शिद्दत
से
साल
दो
साल
तलक
मैं
भी
रहा
हूँ
तन्हा
ख़्वाब
तुमने
जो
दिखाए
थे
मुझे
उल्फ़त
में
मैं
जनाज़े
के
तले
उनके
दबा
हूँ
तन्हा
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Dipendra Singh 'Raaz'
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कभी
शायद
किसी
ने
ख़्वाब
में
सोचा
न
होगा
किसी
का
एक
जुमला
जान
ले
लेगा
किसी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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