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Dipendra Singh 'Raaz'
hamesha ird-gird ghoomta raha hai chaand ke
hamesha ird-gird ghoomta raha hai chaand ke | हमेशा इर्द-गिर्द घूमता रहा है चांँद के
- Dipendra Singh 'Raaz'
हमेशा
इर्द-गिर्द
घूमता
रहा
है
चांँद
के
नसीब
में
चकोर
के
भले
ही
चांँद
था
नहीं
- Dipendra Singh 'Raaz'
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मेरी
क़िस्मत
कि
ये
दुनिया
मुझे
पहचानती
है
लोग
मर
जाते
हैं
पहचान
बनाने
के
लिए
Nadeem Farrukh
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कहीं
गुलाल
के
हिस्से
में
कोई
गाल
नहीं
कहीं
पे
गाल
की
तक़दीर
में
गुलाल
नहीं
Harman Dinesh
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फिर
एक
रोज़
मुक़द्दर
से
हार
मानी
गई
ज़बीन
चूम
के
बोला
गया
"ख़ुदा
हाफ़िज़"
Afkar Alvi
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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तदबीर
के
दस्त-ए-रंगीं
से
तक़दीर
दरख़्शाँ
होती
है
क़ुदरत
भी
मदद
फ़रमाती
है
जब
कोशिश-ए-इंसाँ
होती
है
Hafeez Banarasi
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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इस
सेे
पहले
की
तुम
बदल
जाओ
तुम
मिरे
ख़्वाब
से
निकल
जाओ
इश्क़
ताज़ा
तुम्हारा
है
अब
तक
है
अभी
वक़्त
तुम
संभल
जाओ
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Dipendra Singh 'Raaz'
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याद
आईं
चाँद
की
देखा
जो
तुमको
चाँद
को
देखा
जो
तो
तुम
याद
आईं
Dipendra Singh 'Raaz'
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परिंदों
की
भी
फितरत
सच
कहूँ
औलाद
जैसी
है
निकल
आते
हैं
जब
पर
तो
शजर
को
छोड़
देते
हैं
Dipendra Singh 'Raaz'
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उम्र
के
आख़िरी
दिनों
में
भी
तेरी
तस्वीर
साफ़
दिखती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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गले
मिलना
मुकद्दर
में
कहाँँ
है
हमारी
ईद
फिर
से
राएगांँ
हैै
'वो
मेरी
ज़िंदगी'
उनवान
से
जो
मेरी
जो
नज़्म
है,
इक
दास्तांँ
है
मेरी
छोड़ो
मुझे
बस
ये
बता
दो
मेरा
वो
शख़्स
तो
ख़ुश
है,
जहाँँ
है
हमारी
रूह
तक
में
है
उदासी
हमारा
जिस्म
ही
इसका
मकाँँ
है
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Dipendra Singh 'Raaz'
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