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Dipendra Singh 'Raaz'
badi mushkil hui thii mujhko magar kaat diye
badi mushkil hui thii mujhko magar kaat diye | बड़ी मुश्किल हुई थी मुझको मगर काट दिए
- Dipendra Singh 'Raaz'
बड़ी
मुश्किल
हुई
थी
मुझको
मगर
काट
दिए
हिज्र
में
थे
जो
मेरे
गर्द-ए-सफ़र
काट
दिए
मेरे
सय्याद
को
थी
इतनी
मुहब्बत
मुझ
सेे
कि
बड़े
प्यार
से
उसने
मेरे
पर
काट
दिए
काम
निकले
जो
भुला
बैठे
फिर
अहबाब
सभी
छाँव
आनी
जो
हुई
बंद
शजर
काट
दिए
- Dipendra Singh 'Raaz'
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सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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उसने
कहा
के
याद
न
आना
मुझे
कभी
सो
मैं
दुआएंँ
कर
रहा
हूँ
मौत
की
मेरे
Dipendra Singh 'Raaz'
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इज़्ज़त-ओ-आबरू
के
डर
से
फिर
इक
वालिद
ने
अपनी
बेटी
की
मोहब्बत
का
गला
घोंट
दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
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रोकने
से
कभी
नहीं
रुकती
तेरी
यादें
भी
सांँस
जैसी
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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तेरे
फूलों
को
किताबों
में
छुपा
रक्खा
है
तेरी
तस्वीर
को
सिरहाने
लगा
रक्खा
है
तुझ
सेे
मिलकर
के
गले
रख
दिए
अलमारी
में
तेरी
ख़ुशबू
को
लिबासों
में
दबा
रक्खा
है
उम्र
भर
हाथ
ये
तेरा
नहीं
है
मेरा
मगर
ये
भी
काफ़ी
है
के
कुछ
देर
थमा
रक्खा
है
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Dipendra Singh 'Raaz'
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किसी
की
लौट
आई
है
मुहब्बत
कोई
फिर
से
अकेला
पड़
गया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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