ik hare khat men koi baat puraani padhna | इक हरे ख़त में कोई बात पुरानी पढ़ना

  - Dinesh naaidu
इकहरेख़तमेंकोईबातपुरानीपढ़ना
कितनामुश्किलहैकिसीआँखकापानीपढ़ना
कुछकुछसोचनाबससोचनायूँँहीदिनभर
औरफिररातमेंपरियोंकीकहानीपढ़ना
एकहीचेहरेकीबौछारहैक़िस्साअपना
मेरीआँखोंसेइसेदुश्मन-ए-जानीपढ़ना
कूदजानातिरीयादोंकेसमुंदरमेंफिर
डूबतेडूबतेमौजोंकीरवानीपढ़ना
आख़रीबारमुझेदेखनाजातेजाते
सूखीआँखोंसेमिरासैल-ए-मआ'नीपढ़ना
मैंनेइकदौरकासावनहैकियानज़्मयहाँ
तूकभीकेमिरीआँखोंकापानीपढ़ना
  - Dinesh naaidu
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