ham aayat-e-quraani us vaqt hi padhte hain | हम आयत-ए-क़ुरआनी उस वक़्त ही पढ़ते हैं

  - Dilshad Naseem
हमआयत-ए-क़ुरआनीउसवक़्तहीपढ़तेहैं
होजानहथेलीपरतूफ़ाँसेगुज़रतेहैं
कबताब-ए-नज़ाराहैबसदीदकीहसरतहै
मिलजाओकिसीदिनतुमदिनराततड़पतेहैं
रहताहैमोहब्बतकोहरवक़्तहीधड़कासा
मौसमकीतरहकहतेहैंदोस्तबदलतेहैं
येरातकीरानीतोअबमेरीसहेलीहै
हमहँसतेहैंदोनोंहीदोनोंहीमहकतेहैं
देतेहैंमुझेहरदिनतारीख़वोआनेकी
वा'दोंसेमुकरतेहैंकबइश्क़वोकरतेहैं
सोचाहैतुम्हेंइतनापरयादनहींकितना
शबयूँँहीगुज़रतीहैहमआहेंहीभरतेहैं
इनरेशमीयादोंनेउलझाकेरखामुझको
दिनमेरेतोअक्सरअबरातोंसेउलझतेहैं
जिनप्यारकेलम्होंसेदिलशादसारहताथा
'दिलशाद'वहीलम्हेरंजूरसाकरतेहैं
  - Dilshad Naseem
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy