phir gulaab ki shaakhen saj gaiin qareenon se | फिर गुलाब की शाख़ें सज गईं क़रीनों से

  - Dilkash Sagari
फिरगुलाबकीशाख़ेंसजगईंक़रीनोंसे
आपभीउतरआएँचाँदनीकेज़ीनोंसे
अपनीपाक-बाज़ीकाफिरसुबूतदेलेना
तुमलहूतोधोडालोपहलेआस्तीनोंसे
दुश्मनोंकेख़ेमोंमेंखुलकेजाइएसाहब
हाँमगरबचेरहिएख़ुश-अदाहसीनोंसे
उनकेआरिज़-ओ-लबकोचाँदसेदोतश्बीह
पत्थरोंकोक्यानिस्बतक़ीमतीनगीनोंसे
कोईउनकोजाकरयेइल्तिमासपहुँचादे
आपकोनहींदेखाडेढ़-दोमहीनोंसे
ख़ुश-लिबासमौजोंनेपैरहनबदलडाले
आपभीज़रालंगरखोलिएसफ़ीनोंसे
मा-सिवा-ए-महरूमीऔरकुछनहींपाया
आक़िलोंकीबस्तीमेंमिललिएज़हीनोंसे
  - Dilkash Sagari
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