main surkh phool ko choo kar palatne vaala tha | मैं सुर्ख़ फूल को छू कर पलटने वाला था

  - Dilawar Ali Aazar
मैंसुर्ख़फूलकोछूकरपलटनेवालाथा
वोजज़्बथाकिमिराजिस्मकटनेवालाथा
उसएकरंगसेपैदाहुईयेक़ौस-ए-क़ुज़ह
वोएकरंगजोमंज़रसेहटनेवालाथा
मिरेक़रीबहीइकताक़मेंकिताबेंथीं
मगरयेध्यानकहींऔरबटनेवालाथा
अजीबशानसेउतरीथीधूपख़्वाहिशकी
मैंअपनेसाएसेजैसेलिपटनेवालाथा
तवीलगुफ़्तुगूहोतीरहीसितारोंसे
निगार-ख़ाना-ए-हस्तीउलटनेवालाथा
ज़मींपेआमद-ए-आदमकाशोरबरपाहुआ
वगरनारिज़्क़फ़रिश्तोंमेंबटनेवालाथा
ख़ुदाकाशुक्रहैनश्शाउतरगयामेरा
किमैंसुबूमेंसमुंदरउलटनेवालाथा
लपकरहीथीकोईआगइसतरफ़'आज़र'
मैंउससेदूरबहुतदूरहटनेवालाथा
  - Dilawar Ali Aazar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy