hawa ne ism kuchh aisa padha tha | हवा ने इस्म कुछ ऐसा पढ़ा था

  - Dilawar Ali Aazar
हवानेइस्मकुछऐसापढ़ाथा
दियादीवारपरचलनेलगाथा
मैंसेहर-ए-ख़्वाबसेउट्ठातोदेखा
कोईखिड़कीमेंसूरजरखगयाथा
खड़ाथामुंतज़िरदहलीज़परमैं
मुझेइकसायामिलनेरहाथा
तिरेआनेसेयेउक़्दाखुलाहै
मैंअपनेआपमेंरक्खाहुआथा
सभीलफ़्ज़ोंसेतस्वीरेंबनाईं
मिरीपोरोंमेंमंज़ररेंगताथा
मुझेतेरेइरादोंकीख़बरथी
सोगहरीनींदमेंभीजागताथा
मैंजबमैदानख़ालीकरकेआया
मिरादुश्मनअकेलारहगयाथा
सभीकेहाथमेंपत्थरथे'आज़र'
हमारेहाथमेंइकआईनाथा
  - Dilawar Ali Aazar
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