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Dhiraj Singh 'Tahammul'
aapko aksar khade hokar kinaare dekhte hain
aapko aksar khade hokar kinaare dekhte hain | आपको अकसर खड़े होकर किनारे देखते हैं
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
आपको
अकसर
खड़े
होकर
किनारे
देखते
हैं
डूबते
जाते
हैं
तिनकों
के
सहारे
देखते
हैं
देखते
हैं
देखने
वाले
न
जाने
आप
में
क्या
हम
हमारी
क़त्ल
के
मौज़ूँ
इशारे
देखते
हैं
हो
भला
गुस्ताख़
कैसे
अस्मत-ए-मरियम
में
कोई
चाँद
है
लुकता
हिजाबों
से
सितारे
देखते
हैं
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
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उस
चाँद
को
भी
रश्क
होता
था
उसी
को
देख
कर
मैं
भी
खुले
आकाश
में
तस्वीर
उसकी
चूमता
Ankit Yadav
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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तेरी
हर
बात
मोहब्बत
में
गवारा
कर
के
दिल
के
बाज़ार
में
बैठे
हैं
ख़सारा
कर
के
आसमानों
की
तरफ़
फेंक
दिया
है
मैं
ने
चंद
मिट्टी
के
चराग़ों
को
सितारा
कर
के
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Rahat Indori
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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मैं
पर्वतों
से
लड़ता
रहा
और
चंद
लोग
गीली
ज़मीन
खोद
के
फ़रहाद
हो
गए
Rahat Indori
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वहाँ
ईद
क्या
वहाँ
दीद
क्या
जहाँ
चाँद
रात
न
आई
हो
Shariq Kaifi
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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कि
जैसे
चाँद
निकलेगा
यहीं
से
मैं
ऐसे
एक
खिड़की
देखता
हूँ
Aks samastipuri
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उस
के
चेहरे
की
चमक
के
सामने
सादा
लगा
आसमाँ
पे
चाँद
पूरा
था
मगर
आधा
लगा
Iftikhar Naseem
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फ़क़त
हम
ही
नहीं
रुसवा
हुए
हैं
जान
दिल्ली
में
कई
शाहों
के
टूटे
हैं
यहाँ
अरमान
दिल्ली
में
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शाम
को
दीदार
अपना
आइने
में
हो
गया
फ़ाश
सब
किरदार
अपना
आइने
में
हो
गया
बरगुज़ीदा
एक
सूरत
क़ैद
आँखों
में
हुई
और
बस
घर-बार
अपना
आइने
में
हो
गया
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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आह
से
कराह
की
है
चाह
पर
हूँ
चुप
अब
फ़क़त
है
दर्द
से
निबाह
पर
हूँ
चुप
कर
दिया
है
क़त्ल
मैंने
आप
को
कहीं
और
हूँ
मैं
आप
ही
गवाह
पर
हूँ
चुप
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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चराग़ाँ
ढूँढते
हैं
आतिश-ए-दिल
को
बुझाने
को
मुहब्बत
की
समझ
दे
कौन
इस
जाहिल
ज़माने
को
फ़रार-ए-क़ैद
लेकर
उड़
गया
ख़ुशियाँ
घराने
की
किया
था
क़ैद
इक
पंछी
कि
घर
का
दिल
लगाने
को
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इशारों
ही
में
हाल-ए-दिल
मैं
सारा
खोल
जाता
हूँ
बहुत
ख़ामोश
रहकर
भी
बहुत
कुछ
बोल
जाता
हूँ
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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