dukh sahte hain chup rahte hain | दुख सहते हैं चुप रहते हैं

  - Dheerendra Singh Faiyaz
दुखसहतेहैंचुपरहतेहैं
रोनेवालोंसेअच्छेहैं
जीहल्काकरनाहीनहींहै
वर्नातोआँसूइतनेहैं
करलेतेहैंआँखेंपत्थर
मेरेजैसेजबरोतेहैं
जिनकीउमीदहोआनेकी
उनकाभीरस्तातकतेहैं
बदनहूँयामैंशाख़शजरकी
मुझसेकितनेगुललिपटेहैं
राहमेंइकभीजिस्मनहींहै
जानेयेकिसकेसाएहैं
ऐसीधूपकाहासिलक्याहै
मंज़रतोकालेकालेहैं
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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