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Dharmesh Solanki
KHud ko u
KHud ko u | ख़ुद को ऊपर उठा उसे न गिरा
- Dharmesh Solanki
ख़ुद
को
ऊपर
उठा
उसे
न
गिरा
सुर्ख़-रू
हो
के
इंतिक़ाम
ले
दोस्त
- Dharmesh Solanki
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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अपनी
बाँहो
से
क्यूँँ
हटाऊँ
उसे
सो
रहा
है
तो
क्यूँँ
जगाऊँ
उसे
जो
भी
मिलता
है
उसका
पूछता
है
यार
किस
किस
से
मैं
छुपाऊँ
उसे
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Kafeel Rana
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यार
इक
बार
परिंदों
को
हुकूमत
दे
दो
ये
किसी
शहर
को
मक़्तल
नहीं
होने
देंगे
ये
जो
चेहरे
हैं
यहाँ
चाँद
से
चेहरे
'ताबिश'
ये
मिरा
इश्क़
मुकम्मल
नहीं
होने
देंगे
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Abbas Tabish
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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दुनिया
की
नज़रों
में
हम
तो
जोकर
हैं
सबको
ख़ुश
रक्खें
मतलब
वो
जोकर
हैं
ख़त्म
कहानी
कर
के
जब
तुम
ही
ख़ुश
हो
अपना
क्या
है
यार
अपन
तो
जोकर
हैं
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Nadim Nadeem
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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बिछड़ने
वाले
जिन
में
फिर
से
मिल
जाएँ
वो
फिल्में
देखनी
ही
छोड़
दी
हैं
Dharmesh Solanki
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वो
भी
हँस
रहा
था
मिरी
ग़लतियों
पर
जिसे
सीखना
था
कुछ
इन
ग़लतियों
से
Dharmesh Solanki
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सुन
कि
कुछ
कह
रही
है
मेरी
निगाह
आज
ख़ामोश
सी
है
मेरी
निगाह
चाँद
जैसी
ये
शक्ल
किस
की
है
जिस
पे
कब
से
टिकी
है
मेरी
निगाह
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Dharmesh Solanki
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देख
लो
ख़ुद
को
रख
के
मेरी
जगह
बे-वफ़ा
थोड़ा
कम
लगूँगा
मैं
Dharmesh Solanki
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अपने
वालिद
की
रख
गई
इज़्ज़त
मुझ
सेे
अगले
जनम
का
वा'दा
किया
Dharmesh Solanki
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