ik qatre ko dariyaa samjha main bhi kaisa paagal hooñ | इक क़तरे को दरिया समझा मैं भी कैसा पागल हूँ

  - Devmani pandey
इकक़तरेकोदरियासमझामैंभीकैसापागलहूँ
हरसपनेकोसच्चासमझामैंभीकैसापागलहूँ
बीचदिलोंकेवोदूरीथीतयकरनाआसानथा
आँखोंकोइकरस्तासमझामैंभीकैसापागलहूँ
बड़ाकियाथापाल-पोसकरफिरभीइकदिनबिछड़गए
ख़्वाबोंकोइकबच्चासमझामैंभीकैसापागलहूँ
काँटेसीख़ुदमेरीशोहरतहर-पलदिलमेंचुभतीहै
फ़नकोखेल-तमाशासमझामैंभीकैसापागलहूँ
तनपरतोउजलेकपड़ेथेलेकिनमनकेकालेथे
उनलोगोंकोअच्छासमझामैंभीकैसापागलहूँ
  - Devmani pandey
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