hai aks-e-aaina dil men kisi bilqees-e-saani ka | है अक्स-ए-आईना दिल में किसी बिलक़ीस-ए-सानी का

  - Dattatriya Kaifi
हैअक्स-ए-आईनादिलमेंकिसीबिलक़ीस-ए-सानीका
तसव्वुरहैमिराउस्तादबहज़ादऔरमानीका
ग़नीमतसमझोयेमिलबैठनायारान-ए-जानीका
भरोसाक्याहैदुनियामेंदो-रोज़ाज़िंदगानीका
नज़ाकतहोगईज़र्बुल-मसलउनकीज़मानेमें
भलाहोयाउलूहीइसहमारीसख़्त-जानीका
हैअक्सइसचश्म-ए-पुर-नममेंकिसीआबीदुपट्टेका
बनायाहैमकाँहमनेअजबपानीमेंपानीका
ग़ज़बकाकाटकरकरतीहैंअदाएँउसपरी-वशकी
उभारोंपरहैजोबनऔरआलमहैजवानीका
उमंगोंकीकसकबेचैनकरतीहैउन्हेंलेकिन
नज़ाकतरोकदेतीहैइरादानौजवानीका
शब-ए-फ़ुर्क़तजोठंडेठंडेहोजाएविसालअपना
गुमाँहोमौतपरअपनीहयात-ए-जावेदानीका
येदिलक्यूँँबुझगयासोज़-ए-फ़िराक़-ए-शो'ला-रूयाँमें
तमाशाहैकियाहैआगनेयाँकामपानीका
ख़यालइकचश्म-ए-मयगूँकासदामसरूररखताहै
यहाँक्याकामहैसाक़ीशराब-ए-अर्ग़वानीका
यहीहैंदेखलोवोशाइ'र-ए-मोजिज़-बयाँ'कैफ़ी'
ज़मानेमेंहैचर्चाआजजिनकीख़ुश-बयानीका
  - Dattatriya Kaifi
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