ik tilism-e-ajab-numa hooñ main | इक तिलिस्म-ए-अजब-नुमा हूँ मैं

  - Dattatriya Kaifi
इकतिलिस्म-ए-अजब-नुमाहूँमैं
क्याबताऊँतुम्हेंकिक्याहूँमैं
हैज़वालअपनाइकनिशान-ए-कमाल
बदोकीतरहघटगयाहूँमैं
क्यानिशाँपूछतेहोतुममेरा
रह-ए-गुम-गश्ताकापताहूँमैं
हैयेहैरतकिहूँतजस्सुम-ए-दर्द
औरहरदर्दकीदवाहूँमैं
मेरीशोहरतहैमेरीगुमनामी
क़ुव्वत-ए-बाज़ू-ए-हुमाहूँमैं
रह-ए-उल्फ़तमेंनक़्श-ए-पाकीतरह
ख़ाकहोहोकेमिटगयाहूँमैं
साग़र-ए-इश्क़करगयाबे-ख़ुद
होशकिसकोनहींहूँयाहूँमैं
ख़ाकसमझोतुमआबरूमेरी
दर्द-ए-ए'ज़ाज़कीबहाहूँमैं
दमग़नीमतहैसालिकोमेरा
जरस-ए-दौरकीसदाहूँमैं
हूँसुराहीमेंबादा-ए-अहमर
औरमय-ए-सुर्ख़मेंनशाहूँमैं
जिसतरहसेकँवलहोपानीमें
होकेदुनियामेंफिरजुदाहूँमैं
ख़ाकसारीहैमेरीजौहर-ए-ज़ात
ख़ाकमेंमिस्ल-ए-कीमियाहूँमैं
दुरदुरुज-ए-वफ़ाकीआबहूँमैं
दिलकेआईनेकीसफ़ाहूँमैं
आजहैमेरीधाकआलममें
रू-शनास-ए-शह-ओ-गदाहूँमैं
धूमहैफ़न्न-ए-शेरमेंमेरी
क़मर-ए-इल्मकीज़ियाहूँमैं
लिखूँगरदास्तान-ए-रंज-ओ-अलम
दिल-ए-ब-शिकस्ताकीसदाहूँमैं
गरकरूँँज़िक्र-ए-साज़-ए-ऐश-ओ-तरब
तूती-ए-ख़ुल्दकीनवाहूँमैं
गरमैंलिक्खूँबयान-ए-अर्सा-ए-रज़्म
नावक-ए-तरकशक़ज़ाहूँमैं
एकइसनज़्मपरहैक्यामौक़ूफ़
नूरशम-ए-उलूमकाहूँमैं
क़द्रहैमेरीक़दर-ए-इल्म-ओ-हुनर
क्याज़मानेमेंदूसराहूँमैं
हूँतोसबकुछपेकुछनहीं'कैफ़ी'
सूरत-ए-मौजा-ए-फ़नाहूँमैं
  - Dattatriya Kaifi
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