bataayen kya tujh ko chashm-e-pur-nam hua hai kya khun aarzoo ka | बताएँ क्या तुझ को चश्म-ए-पुर-नम हुआ है क्या ख़ूँ आरज़ू का

  - Dattatriya Kaifi
बताएँक्यातुझकोचश्म-ए-पुर-नमहुआहैक्याख़ूँआरज़ूका
बनागुल-ए-दाग़-ए-यास-ओ-हसरतजोदिलमेंक़तराबचालहूका
दबेजोघुटघुटकेदिलमेंअरमाँवोबर्क़बनकरफ़लकपेतड़पे
जोवलवलाजीमेंरहगयाथावोबुलबुलाअबहैआब-ए-जूका
अबसहैतोचारा-गर-ए-परेशाँतुझसेकुछबनपड़ेगादरमाँ
किहोतोतार-ए-नफ़ससेसामाँजराहत-ए-दिलकेहोरफ़ूका
खुलालब-ए-गोरसेयेउक़्दाकिख़्वाबथीसबनुमूद-ए-हस्ती
वुक़ूफ़ना-महरूमी-ए-मंज़िलकमालहैमेरीजुस्तुजूका
तुझकोमस्त-ए-हवा-ए-गुलशनख़िज़ाँमेंअंदलीबदेखा
नहींतूशैदाईबाग़-ओ-गुलकामगरफ़िदाईहैरंग-ओ-बूका
उसेफिरकुछदियादिखाईनज़रपड़ावोजमालजिसको
खुलाहक़ीक़तकाराज़जिसपरउसकोयाराथागुफ़्तुगूका
हैनफ़-ए-ज़ातऔरनस्ख़-ए-हस्तीविसाल-ए-जानाँकीशर्त-ए-अव्वल
भरामनाज़िरसेहैजहाँसबजोसिर्फ़दर्शनकातूहैभूका
तिलिस्म-ए-दैर-ओ-हरमहैतुझपरहनूज़दिल्लीहैदूरनादाँ
वहाँतिराख़ाकदिललगेगावोहैसरासरमकानहूँका
ख़बरकिसेसुब्ह-ओ-शामकीहैतअ'ईनातऔरक़ुयूदकैसे
नमाज़किसकीवहाँकिसीकोख़यालतकभीनहींवुज़ूका
नहींमुहीत-ए-रुसूम-ओ-मिल्लतहैबे-निशाँमंज़िल-ए-हक़ीक़त
वहाँसिमरनकीहतकड़ीहैतौक़-ए-ज़ुन्नारहैगुलूका
हैंग़र्क़-ए-बहर-ए-मय-ए-मोहब्बतवहाँहै'कैफ़ी'येसबकीहालत
हैदख़्लसाक़ीकीबज़्ममेंक्यासुराही-ओ-साग़र-ओ-सुबूका
  - Dattatriya Kaifi
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