zaahid na kah burii ki ye mastaane aadmi hain | ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं

  - Dagh Dehlvi
ज़ाहिदकहबुरीकियेमस्तानेआदमीहैं
तुझकोलिपटपड़ेंगेदीवानेआदमीहैं
ग़ैरोंकीदोस्तीपरक्यूँँए'तिबारकीजे
येदुश्मनीकरेंगेबेगानेआदमीहैं
जोआदमीपेगुज़रीवोइकसिवातुम्हारे
क्याजीलगाकेसुनतेअफ़्सानेआदमीहैं
क्याजुरअतेंजोहमकोदरबाँतुम्हाराटोके
कहदोकियेतोजाने-पहचानेआदमीहैं
मयबूँदभरपिलाकरक्याहँसरहाहैसाक़ी
भरभरकेपीतेआख़िरपैमानेआदमीहैं
तुमनेहमारेदिलमेंघरकरलियातोक्याहै
आबादकरतेआख़िरवीरानेआदमीहैं
नासेहसेकोईकहदेकीजेकलामऐसा
हज़रतकोताकिकोईयेजानेआदमीहैं
जबदावर-ए-क़यामतपूछेगातुमपेरखकर
कहदेंगेसाफ़हमतोबेगानेआदमीहैं
मैंवोबशरकिमुझसेहरआदमीकोनफ़रत
तुमशम्अवोकितुमपरपरवानेआदमीहैं
महफ़िलभरीहुईहैसौदाइयोंसेउसकी
उसग़ैरत-ए-परीपरदीवानेआदमीहैं
शाबाश'दाग़'तुझकोक्यातेग़-ए-इश्क़खाई
जीकरतेहैंवहीजोमर्दानेआदमीहैं
  - Dagh Dehlvi
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